ममता का कोर्ट जाने का ऐलान
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला किया है। सोमवार को उन्होंने यह जानकारी दी कि इस संबंध में मंगलवार को एक याचिका दायर की जाएगी। ममता ने कहा कि वे एक आम नागरिक के रूप में इस ‘अमानवीय’ प्रक्रिया के खिलाफ खुद पैरवी करेंगी, क्योंकि वे एक प्रशिक्षित वकील हैं। यदि कोर्ट से अनुमति मिली, तो वे सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगी।
SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
ममता ने SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस दौरान गंभीर रूप से बीमार और बुजुर्ग लोगों को अपने पहचान साबित करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। उन्होंने भाजपा नेताओं से पूछा कि यदि उनके माता-पिता को पहचान साबित करने के लिए लाइन में लगाना पड़े, तो उन्हें कैसा लगेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना कारण के मतदाता सूची से नाम हटा दिए जा रहे हैं, जिससे चुनाव से पहले प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है।
देशभर में वोटर्स के नाम कटे
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव से पहले लोगों को प्रलोभन देती है और जीतने के बाद दमनकारी कार्रवाई करती है। उनके अनुसार, देशभर में SIR प्रक्रिया के तहत अब तक 11 राज्यों के 3.69 करोड़ वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं। सबसे ज्यादा नाम पश्चिम बंगाल में 58.20 लाख और मध्य प्रदेश में 42.74 लाख वोटर्स के हैं।
अर्थ और प्रभाव
ममता बनर्जी का यह कदम वोटर अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या कार्रवाई होती है। उनके द्वारा उठाए गए सवाल न केवल बंगाल, बल्कि पूरे देश में मतदाता मुद्दों पर विचार करने का एक नया दृष्टिकोण दे सकते हैं.












