राजनीति में उठक-पटक
छत्तीसगढ़ की राजनीति में हालिया हलचलें बढ़ती जा रही हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कांग्रेस के भीतर गुटबाजी पर खुलकर बात की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी में अनुशासन को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। ‘सरगुजा महाराज’ नामक वॉट्सऐप ग्रुप में सदस्यों के बीच आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सिंहदेव ने बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला कि वे इस ग्रुप के एडमिन भी हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोई सदस्य मर्यादित सीमाएं लांघता है, तो उसे तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।” उनका यह बयान कांग्रेस के अंदर अनुशासन और आंतरिक राजनीति का स्पष्ट संकेत देता है, जो भविष्य में रायपुर की राजनीति को प्रभावित कर सकता है.
मनरेगा पर ध्यानाकर्षण
सिंहदेव ने मनरेगा के नाम बदलने के मुद्दे पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उनका मानना है कि इसे सामान्य ‘मिशन’ में बदलने से इसके मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने भगवान राम के नाम को ग्रामीण आजीविका मिशन में शामिल करने पर भी अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि इस मिशन का धार्मिक संदर्भ से कोई सीधा संबंध नहीं है और भाजपा पर आरोप लगाया कि राजनीति के धुप में धर्म का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मुद्दे के आस-पास की बहस निश्चितरूप से मनरेगा और छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाएगी.
कर्मचारियों की जवाबदेही
अंत में, सिंहदेव ने पिछले कुछ वर्षों में मंत्रियों के ओएसडी और पीए में बदलावों पर भी अपनी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ओएसडी और पीए सरकारी प्रणाली का एक संवेदनशील हिस्सा होते हैं और उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जानी चाहिए। कुछ अनैतिक गतिविधियों की खबरों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्हें हाल ही में तमिलनाडु-पुडुचेरी पीसीसी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, जिसका उन्होंने आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे अपने लिए एक बड़ी चुनौती माना और आगामी चुनावों में गठबंधन के साथ सहयोग करने की बात भी कही। यह उनके लिए एक नए अवसर को दर्शाता है।












