छत्तीसगढ़ शराब घोटाला – पूर्व सीएम के बेटे पर ₹250 करोड़ लेने का गंभीर आरोप

By Narendra Kumar

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छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राज्य के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में एंटी-करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ACB/EOW) ने एक सनसनीखेज चार्जशीट दाखिल की है। इस आरोप पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर घोटाले की राशि में से करोड़ों रुपये का हिस्सा लेने का सीधा आरोप लगाया गया है।

चैतन्य बघेल: सिंडिकेट के ‘कोऑर्डिनेटर’ और मास्टरमाइंड?

Raipurbuzz.com को मिली जानकारी के अनुसार, ACB/EOW द्वारा विशेष अदालत में पेश की गई सातवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल ने आबकारी विभाग के भीतर अवैध वसूली का रैकेट (सिंडिकेट) चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लगभग 3,800 पन्नों के इस भारी-भरकम दस्तावेज में बताया गया है कि 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार के दौरान चैतन्य ने प्रशासनिक अधिकारियों और जमीनी स्तर के गुर्गों के बीच एक ‘कोऑर्डिनेटर’ के रूप में काम किया।

एजेंसी का आरोप है कि चैतन्य बघेल ने अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों और अनवर ढेबर जैसे कारोबारियों को निर्देश दिए और सिंडिकेट के हितों की रक्षा की।

₹250 करोड़ का हिस्सा और रियल एस्टेट में निवेश

जांच एजेंसी ने चार्जशीट में स्पष्ट किया है कि चैतन्य बघेल को इस घोटाले से उनके हिस्से के रूप में ₹200 करोड़ से ₹250 करोड़ प्राप्त हुए। यह पैसा कथित तौर पर शराब कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों की विभिन्न फर्मों के माध्यम से बैंकिंग चैनलों के जरिए उनके परिवार की कंपनियों में स्थानांतरित किया गया था।

इतना ही नहीं, इस अवैध कमाई को चैतन्य ने अपने दोस्तों और करीबियों के नाम पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तो अपनी अलग जांच में यहाँ तक दावा किया है कि चैतन्य ने ₹1,000 करोड़ से अधिक के “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध की कमाई) को संभाला था।

₹3,500 करोड़ से ऊपर जा सकता है घोटाले का आंकड़ा

ACB/EOW की जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार, शराब घोटाले की अनुमानित राशि जो पहले ₹3,074 करोड़ बताई जा रही थी, वह अब ₹3,500 करोड़ के पार जा सकती है। जांच में पाया गया कि 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में बिकने वाली हर शराब की बोतल से अवैध रूप से पैसा वसूला गया था।

इस सिंडिकेट को चैतन्य बघेल द्वारा दिए गए उच्च स्तरीय संरक्षण और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण यह अवैध काम लंबे समय तक चलता रहा।

राजनीतिक बदले की भावना या भ्रष्टाचार?

इस मामले में चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इन कार्यवाहियों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। बघेल का दावा है कि उनकी सरकार ने राज्य में वनों की कटाई और खनन गतिविधियों को रोकने की कोशिश की थी, इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने जांच एजेंसियों पर विपक्ष के नेताओं को टारगेट करने के लिए दुरुपयोग किए जाने का आरोप भी लगाया है।

अब तक की बड़ी गिरफ्तारियां

इस मामले में अब तक कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा
  • पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा
  • कारोबारी अनवर ढेबर
  • आईएएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी

चैतन्य बघेल को ED ने जुलाई 2024 में भिलाई स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया था, और बाद में सितंबर में उन्हें ACB/EOW ने अपनी हिरासत में ले लिया।

Raipurbuzz.com का विश्लेषण: छत्तीसगढ़ के इस शराब घोटाले ने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। ₹3,500 करोड़ की यह राशि राज्य के खजाने को हुआ एक बड़ा नुकसान है। अब देखना यह है कि अदालत में ये आरोप कितने पुख्ता साबित होते हैं।

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