छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल
छत्तीसगढ़ की राजनीति में फिर से भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मिल गई है। इसके बाद से रायपुर सेंट्रल जेल से उनकी रिहाई ने पूरे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। भाजपा ने इसको लेकर भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार के एक राजनीतिक साजिश के तहत कुछ नेताओं को फंसाया गया था। Raipurbuzz के अनुसार, यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है।
कवासी लखमा और चैतन्य बघेल: न्याय पर सवाल
भाजपा नेताओं का कहना है कि चैतन्य बघेल को एक गंभीर शराब घोटाले में जमानत मिलने के बावजूद पूर्व मंत्री कवासी लखमा अभी भी जेल में हैं। भाजपा का आरोप है कि लखमा को जानबूझकर निशाना बनाया गया है और उनके ‘अनपढ़’ होने का फायदा उठाकर उनके खिलाफ साजिश की गई। भाजपा प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने यहां तक कहा कि कांग्रेस में आदिवासी नेताओं का अपमान होता है। भूपेश बघेल ने इसे पूरी तरह से प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है, यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्मागरम बहस का विषय बन गया है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: मामले की गहराई
यह मामला 3200 करोड़ रुपए से अधिक के छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि चैतन्य बघेल ने इस घोटाले में शामिल पैसों की ‘लेयरिंग’ की थी। ED के वकील सौरभ पाण्डेय के अनुसार, इस घोटाले का पैसा अनवर ढेबर के जरिए चैतन्य बघेल तक पहुंचता था। हाल ही में चैतन्य बघेल को कुछ सशर्त जमानत मिली है, जिसमें उन्हें अपना पासपोर्ट कोर्ट को सौंपना होगा और किसी भी केस से जुड़े व्यक्ति को प्रलोभन न देने की हिदायत भी दी गई है।












