रायपुर में दूषित पानी का खतरा: इंदौर से सबक

By Raipur Buzz

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इंदौर त्रासदी के बाद रायपुर में चिंता

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई भयावह मौतों के बाद राजधानी रायपुर में चिंता की लहर दौड़ गई है। Raipurbuzz की जांच में यह बात सामने आई है कि रायपुर की कई प्रमुख पानी की पाइपलाइनें नालों के किनारे से गुजर रही हैं। इसे देखते हुए मोवा, सड्डू और जोरा क्षेत्रों में गंदे पानी की समस्या आम हो गई है। स्थानीय निवासी अक्सर शिकायत करते हैं कि उनके नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आता है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। इस स्थिति ने शहर के जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

प्रशासन की सक्रियता और सामूहिक प्रयास

इंदौर में हुई घटनाओं के बाद रायपुर का प्रशासन सतर्क हो गया है। महापौर मीनल चौबे और नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया है। कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया है कि सभी नगर निकायों और पंचायतों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराई जाए ताकि लोगों को साफ और सुरक्षित पानी मिल सके। इस बीच, प्रशासन ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से गंदे पानी का उपचार और उसे उद्योगों को बेचकर निगम की आय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई पाइपलाइनें 30 से 40 साल पुरानी हो चुकी हैं, जो दवाब में टूट जाती हैं।

स्वास्थ्य संकट और त्वरित समाधान की ज़रूरत

रायपुर में गंदे पानी के कारण हर साल पीलिया और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है, खासकर बारिश के मौसम में। 2020 में पीलिया के मरीजों की संख्या 700 से अधिक थी। 2024 में लाभांडी में 25 से ज्यादा लोग पीलिया से ग्रसित पाए गए। वर्तमान में, अभनपुर के आस-पास भी गंभीर स्थिति है। नगर निगम ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-0008 जारी किया है, लेकिन शिकायत का समाधान जल्दी नहीं हो पा रहा। नई पाइपलाइन की खुदाई प्रक्रिया भी पुरानी लाइनों को नुकसान पहुंचा रही है। इस प्रमुख स्वास्थ्य संकट का त्वरित समाधान आवश्यक है।

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